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Showing posts from September, 2020

मुर्ती कशा ओळखायच्या?

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मुर्ती कशा ओळखायच्या? Maharashtra Times  |  Updated: 10 Jul 2016, 03:07:00 AM घरापासून मंदिरांपर्यंत अनेक मूर्ती आपण बघत असतो. या मूर्ती सरावाने आपण ओळखतो. तरीही अनेक मूर्तींची ओळख आपल्याला सहजासहजी पटत नाही. म्हणूनच विविध देवतांची चिह्नं जाणून घेतली, तर मूर्ती ओळखणं एकदम सोपं होऊन जाईल.         डॉ. किरण देशमुख  सभोवतालचा सोसाट्याचा वारा (वायू), आकाशात अचानक चमकणारी वीज (अग्नी), धो-धो पडणारा पाऊस (वरुण) इ. भौगोलिक चमत्कारांमागील वैज्ञानिक कारणे न कळल्यामुळे, प्राथमिक अवस्थेतील मानवाने त्या सर्वांना ‘देवत्व’ दिले आणि ३३ देवांची ३ गटांत निर्मिती झाली. पुढे माणसाने स्वतःच्या कल्पनाविश्वातून देवांची संख्या ३३ कोटी केली. त्याचबरोबर देवांचे निवासस्थान असणारे देवघर आणि देवालये यांचेही आकार व प्रकार वाढवले. शिवाय, त्यातूनच इष्ट देवदेवतांना संतुष्ट करण्यासाठी देवांच्या मूर्तींची संकल्पना पुढे आली.  साहजिकच मग देव मूर्ती कशा स्वरूपात करायच्या? कोणत्या वस्तू वा धातूंपासून तयार करावयाच्या? त्यांची उपासना कशी करायची? याविषयीचे मूर्तिशास्त्र व धर्मशास्त्रही तया...

महादेव शिव के अस्त्र त्रिशूल से जुड़े ऐसे गुप्त एवं गहरे राज

आज जानिये महादेव शिव के अस्त्र त्रिशूल से जुड़े ऐसे गुप्त एवं गहरे राज जिन्हे जान हैरान रह जायेंगे आप !!! धार्मिक ग्रंथो में यह वर्णन मिलता है के इस सम्पूर्ण सृष्टि के संचालन का दायित्व त्रिदेवो (ब्र्ह्मा, विष्णु, महेश) के हाथो में है . ब्रह्म देव ने इस सृष्टि का निर्माण किया है, भगवान विष्णु इस सृष्टि के पालनकर्ता है तथा महादेव शिव संहारकर्ता है।देवो के देव महादेव शिव अत्यन्त निराले तथा इसके साथ ही उनकी वेशभूषा भी अत्यन्त विचित्र है। भगवान शिव का प्रमुख अस्त्र त्रिशूल है। शिव शंकर के हाथ में मौजूद यह त्रिशूल अपने विषय में एक अलग ही कथा प्रस्तुत करता है। कुछ लोग भगवान शिव के अस्त्र त्रिशूल को विनाश की निशानी मानते है। परन्तु वास्तव में भगवान शिव के त्रिशूल के रहस्य को समझपाना भगवान शिव के समान ही रहस्मयी एवं बहुत कठिन है। हमारे हिन्दू धार्मिक पुराणों एवं ग्रंथो में अनेक गूढ़ रहस्य छिपे हुए है जिनमे से एक है भगवान शिव के हाथ में उपस्थित त्रिशूल. आइये जानते है भगवान शिव के त्रिशूल से जुड़े अनोखे एवं रहस्मयी बाते। 1.भगवान शिव के त्रिशूल के संबंध में कहा जाता है की यह त्रिदेवो का प्रतीक ब्र्ह...

कैसे एक भील के बलिदान ने बना दिया उसे भगवान शंकर का सबसे प्रिय भक्त…!!!

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पढ़िए; कैसे एक भील के बलिदान ने बना दिया उसे भगवान शंकर का सबसे प्रिय भक्त…!!! deepika gupta  |  February 14, 2018  |  बाबा महाकाल , सनातन धर्म ,  हिंदू देवी देवता  |  1 Comment एक वक़्त की बात है एक पर्वत पर शिवजी का एक बहुत ही सुन्दर मंदिर था | वहां बहुत से लोग शिवजी की पूजा के लिए आते थे | इनमें दो खास भक्त थे जो रोज़ाना भोलेनाथ की पूजा करने आया करते थे | एक था ब्राह्मण और दूसरा था भील | ब्राह्मण प्रतिदिन शिवजी का अभिषेक करता, उन पर फूल पत्तियां चढ़ाता, गूगल जलाता और चन्दन का लेप करता | बाबा भोलेनाथ वहीँ एक बार भील कुमार कण्णप्प मंदिर में भगवान शंकर की मूर्ति देख कर सोचने लगा की  भगवान इस वन में अकेले हैं। कहीं कोई पशु इन्हें कष्ट न दे। शाम हो गई थी। कण्णप्प धनुष पर बाण चढ़ाकर मंदिर के द्वार पर पहरा देने लगा। सवेरा होने पर उसे भगवान की पूजा करने का विचार आया किंतु वह पूजा करने का तरीका नहीं जानता था। वह वन में गया, पशु मारे और आग में उनका मांस भून लिया। मधुमक्खियों का छत्ता तोड़कर शहद निकाला। एक दोने में शहद और मांस लेकर कुछ पुष्प तोड़कर और नदी का ...

जानिये कहाँ मिली थी शिव पार्वती की खून से लथपथ मूर्तियां….

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जानिये कहाँ मिली थी शिव पार्वती की खून से लथपथ मूर्तियां….. Admin  |  January 22, 2017  |  हिंदू देवी देवता  |  319 Comments हिमाचल प्रदेश के कुरल जिले के समीपवर्ती ननाओं पंचायत में स्थित अक्षैणा महादेव बहुत ही खुबसूरत मंदिर है इस मंदिर में वर्षो पूर्व स्थापित भगवान शिव पार्वती की मूर्तियों के सामने जो श्रद्धालु सच्चे मन से जो मुरादें मांगते हैं वे पूरी होती हैं। बुजुर्गो के अनुसार वर्षो पूर्व कुरल गांव के किसान को खेतों में हल जोतते समय किसी के कराहने की आवाज सुनाई दी थी। काफी लोगों के आने पर तथा खेतों को खोदने पर खून से लथपथ शिव-पार्वती की मूर्तियां मिली थीं। तब यहां पर विशाल हवन यज्ञ का आयोजन किया गया। मूर्तियों पर आज भी हल के निशान देखे जा सकते हैं।   इन मूर्तियों के बारे तरह-तरह की चर्चाओं के बाद महात्माओं की भविष्यवाणी के बाद अक्षैणा महादेव मंदिर बनाया गया, जहां पर पहले भूत प्रेतों का वास था लेकिन भगवान शिव-पार्वती की मूर्तियों की स्थापना के बाद कई साधु-संत तथा महात्मा यहां पर रहने लगे। मंदिर परिसर के चारों ओर रेखा खींचने के बाद यह पवित...

जानिये क्यों दिया पार्वती ने भगवान् विष्णु और रावण को श्राप….

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जानिये क्यों दिया पार्वती ने भगवान् विष्णु और रावण को श्राप…. Admin  |  January 22, 2017  |  हिंदू देवी देवता  |  191 Comments एक बार भगवान शंकर ने माता पार्वती के साथ द्रुत क्रीडा  (जुआ) खेलने की अभिलाषा प्रकट की। खेल में भगवान शंकर अपना सब कुछ हार गए। हारने के बाद भोलेनाथ अपनी लीला को रचते हुए पत्तो के वस्त्र पहनकर गंगा के तट पर चले गए। कार्तिकेय जी को जब सारी बात पता चली, तो वह माता पार्वती से समस्त वस्तुएँ वापस लेने आए। इस बार खेल में पार्वती जी हार गईं तथा कार्तिकेय शंकर जी का सारा सामान लेकर वापस चले गए। अब इधर पार्वती भी चिंतित हो गईं कि सारा सामान भी गया तथा पति भी दूर हो गए। पार्वती जी ने अपनी व्यथा अपने प्रिय पुत्र गणेश को बताई तो मातृ भक्त गणेश  जी स्वयं खेल खेलने शंकर भगवान के पास पहुंचे। गणेश जी जीत गए तथा लौटकर अपनी जीत का समाचार माता को सुनाया। इस पर पार्वती बोलीं कि उन्हें अपने पिता को साथ लेकर आना चाहिए था। गणेश जी फिर भोलेनाथ की खोज करने निकल पड़े। भोलेनाथ से उनकी भेंट हरिद्वार में हुई। उस समय भोले नाथ भगवान विष्णु व कार्तिकेय के...

आखिर क्यों नही की जाती है शिव के आत्मलिंग की पूरी परिक्रमा???

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आखिर क्यों नही की जाती है शिव के आत्मलिंग की पूरी परिक्रमा??? हिन्दू धर्म पंचांग के पांचवे माह श्रावन यानी सावन में शिव पूजा का विशेष महत्व है। हर शिव भक्त अपनी श्रद्धा, आस्था और शक्ति से शिव पूजा कर अपनी कामनाओं को पूरा करना चाहता है। लेकिन शास्त्रों में शिव उपासना के लिए शिवलिंग पूजा की मर्यादाएं भी नियत है। इसकी जानकारी के अभाव में कुछ देव अपराध हो जाते हैं। क्यों करते हैं शिवलिंग की आधी परिक्रमा समय समय पर भगवान शिव ने धरती पे अपनी आत्मा के स्वरुप आत्मलिंग अलग अलग 12 जगहों पर स्थापित किये है, लेकिन फिर भी उन आत्मलिंगो के आज भी पूरी परिक्रमा नही की जाती है। लेकिन क्या रहस्य है की प्रथा के पीछे जिस कारण से सब लोग इस अत्यंत ही सुखदाई परिक्रमा को नही करने को बाध्य है। आज हम आपको ये रहस्य बता रहे है जो शायद पहले किसी ने कभी भी नही बताया होगा। इस परंपरा के पीछे जुडी है एक परम भक्त की भक्ति भगवान शिव की शिव स्तुति “शीश गंग अर्धांग पार्वती नंदी भृंगी नृत्य करत है” में भृंगी नाम आपने सुना होगा, ये एक पौराणिक कालीन ऋषि थे जो की शिव के परम भक्त थे।लेकिन भक्त कुछ ज्यादा ही कट्टर थे, इतने क...

भारतीय पौराणिक कथा

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भारतीय पौराणिक कथा (INDIAN MYTHOLOGICAL STORY) -आप सभी रामायण (Ramayan) के सभी पात्रों से जरूर वाकिफ होंगे लेकिन क्या आप इस महाकाव्य में निभाए गए उन सभी पात्रों को जानते हैं जिन्होंने महाभारत (Mahabharat) में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। महाकाव्य रामायण और महाभारत -नहीं न तो चलिए आज हम आपको उन्हीं पात्रों के बारे में बताते हैं: हनुमान: -रामायण(Ramayan) में प्रमुख भूमिका निभाने वाले भगवान हनुमान महाभारत(Mahabharat) में महाबली भीम से पांडव के वनवास के समय मिले थे। -कई जगह तो यह भी कहा गया है कि भीम(Bheem) और हनुमान(Hanuman) दोनों भाई हैं। परशुराम: -अपने समय के सबसे बड़े ज्ञानी परशुराम को कौन नहीं जानता। रामायण महाभारत में परशुराम -माना जाता है कि  परशुराम  ने 21 बार क्षत्रियों को पृथ्वी से नष्ट कर दिया था। -रामायण(Ramayan) में भी शिव का धनुष तोड़ने पर भगवान राम पर क्रोधित हुए थे। -वहीं अगर महाभारत(Mahabharat) की बात की जाए तो उन्होंने भीष्म के साथ युद्ध किया था और कर्ण को भी ज्ञान दिया था धार्मिक   कथा  ( RELIGIOUS STORY) जाम्बवन्त: -जिस इंजीनियर ने रामायण(Ramaya...

भगवान शिव के गले मे मुंड माला से जुड़े इस रहस्य को जानकर आप हो जाएँगे हैरान!!!

भगवान शिव के गले मे मुंड माला से जुड़े इस रहस्य को जानकर आप हो जाएँगे हैरान!!! आपने भगवान शिव केए बहुत सी तस्वीरो मे देखा होगा जिसमें उन्होने अपने गले मे मुंड माल पहन रखा होता है पर क्या आप जानते है जब शिव जी ने मुंड माल से जुड़े इस रहस्य को माता सती को बताया था तब वे भी हेरान हो गयी थी तोह चलिये आज इस रहस्य को जानते । शिव और सती का अद्भुत प्रेम शास्त्रों में वर्णित है। इसका प्रमाण है सती के यज्ञ कुण्ड में कूदकर आत्मदाह करना और सती के शव को उठाए क्रोधित शिव का तांडव करना। हालांकि यह भी शिव की लीला थी क्योंकि इस बहाने शिव 51 शक्ति पीठों की स्थापना करना चाहते थे। शिव ने सती को पहले ही बता दिया था कि उन्हें यह शरीर त्याग करना है। इसी समय उन्होंने सती को अपने गले में मौजूद मुंडों की माला का रहस्य भी बताया था। एक बार नारद जी के उकसाने पर सती भगवान शिव से जिद करने लगी कि आपके गले में जो मुंड की माला है उसका रहस्य क्या है।शिव जी के बहुत समझाने पर सती नहीं मानी तो भगवान शिव ने रहस्य बता ही दिया। शिव ने सती से कहा कि इस मुंड की माला में जितने भी मुंड यानी सिर हैं वह सभी आपके हैं। सती इस बात का ...

भगवान शिव की इन आठ स्वरुप में समाया है पूरा संसार !

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भगवान शिव की इन आठ स्वरुप में समाया है पूरा संसार ! हिन्दू धर्म मान्यताओं भगवान शिव स्वयंप्रकृति का रूप है। यही कारण है कि शिव एक मात्र ऐसे देवता हैं, जिन्होंने कभी अवतार नहीं लिया।ग्रंथों के अनुसार शिव सभी देवताओं को उनके कार्य के लिए आदेश देते हैं। इसलिए महादेव देह और जगत में आठ रूपों में समाए हैं। शिव के इन आठ रूपों या मूर्तियों में जगत वैसे ही समाया है, जैसे किसी माला के धागे में मोती पिरोए जाते हैं।आईए भगवान शिव के इन स्वरुप के बारे में थोड़ा विस्तार से जानते है। शिव प्रतिमा होती है आठ तरह की शर्व ( Sharva)  :- पूरे जगत को धारण करने वाली पृथ्वीमयी मूर्ति के स्वामी शर्व है, इसलिए इसे शिव की शार्वी प्रतिमा भी कहते हैं। सांसारिक नजरिए से शर्व नाम का अर्थ और शुभ प्रभाव भक्तों के हर को कष्टों को हरने वाला बताया गया है। भीम (Bheema)  : – शिव की आकाशरूपी मूर्ति है, जो बुरे और तामसी गुणों का नाश कर जगत को राहत देने वाली मानी जाती है। इसके स्वामी भीम है। यह भैमी नाम से प्रसिद्ध है। भीम नाम का अर्थ भयंकर रूप वाले भी हैं, जो उनके भस्म से लिपटी देह, जटाजूटधारी, नागों के हार पहनने से ल...

क्या आप जानते है शिवलिंग के पास ताली बजाने से होता है उनका अपमान..!!!

क्या आप जानते है शिवलिंग के पास ताली बजाने से होता है उनका अपमान..!!! आपने देखा ही होगा मंदिर में आरती के दौरान लोग तालियां बजा कर भगवान को प्रसन्न करते है।इसके अलावा आपने देखा होगा कोई भी शुभ मोके पर लोग अक्सर ताली बजा कर अपनी खुशी का इजहार करते हैं। ताली बजने के आपने बहुत सारे फायदे भी होते हैलेकिन आज हम आपको बता रहे है मंदिर में हर समय ताली बजाना सही नहीं होता है और खास कर शिवलिंग के पास में जाकर ताली बजाना उनका अपमान करने सामान है सनातन धर्म की मान्यता के अनुसार आरती के मध्य ही कर्तल ध्वनि उत्पन्न करना उपयुक्त पद्धति है। आरती को छोड़कर अन्य समय में मंदिर में ताली नहीं बजानी चाहिये। कहते हैं कि भगवान शिव के मंदिर में किसी भी समय ताली नहीं बजानी चाहिये। मान्यता अनुसार भगवान शिव ध्यान में मग्न रहते हैं। कभी भी मंदिर में जाकर कुछ लोग उनके शिवलिंग के पास तीन बार ताली बजाते हैं। ये अनुचित है। इस तरह शिवलिंग के पास ताली बजाने से उनका ध्यानभंग हो जाता है। इससे उनके गण रुष्ठ हो जाते हैं। सिर्फ आरती के समय बजायें ताली और आप जब भी शिवमंदिर में जाएं तो सिर्फ संध्यावंदन के समय ही वहां ताली, घंट...

जानिए इस मंदिर का रहस्य जहा अनंत काल से इस मंदिर में निकलती आरही है ज्वाला !!!

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जानिए इस मंदिर का रहस्य जहा अनंत काल से इस मंदिर में निकलती आरही है ज्वाला !!! इस मंदिर में अनंत काल से ज्वाला निकल रही है इसी कारण इसे ज्वालादेवी का मंदिर कहा जाता है । हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में कालीधार पहाड़ी के बीच यह मंदिर बसा हुआ है। देवी के शक्‍ति पीठों में से एक इस मंदिर के बारे में ऐसा कहा जाता है कि यहां पर माता सती की जीभ गिरी थी।इसी कारण यहां पर ज्‍वाला निकलती रहती है। इसके अलावा यहां पर एक और चमत्कार भी देखने को मिलता है। मंदिर परिसर के पास एक जगह है ‘गोरख डिब्बी’ जो कि एक जल कुंड है। इस कुंड में गर्म खौलता हुआ पानी है परंतु छूने पर कुंड का पानी ठंडा लगता है । किसी को इस बात का यह ज्ञात नहीं है कि ये ज्वालाएं कहां से प्रकट हो रही हैं ? ये रंग का परिवर्तन कैसे हो रहा है ? आज भी लोगों को यह पता नहीं चल पाया है यह प्रज्वलित कैसे होती है तथा यह कब तक जलती रहेगी? कहते हैं, कुछ मुस्लिम शासकों ने ज्वाला को बुझाने के प्रयास भी किए थे, लेकिन वे विफल रहे। हजारों वर्षों से यहां देवी के मुख से अग्नि निकल रही है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर की खोज पांडवों ने की थी।इस जगह का एक अ...

जानिए भगवान शिव की इस पिंडी पर चढ़ने वाले जल रहस्य के बारे मे !!

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जानिए भगवान शिव की इस पिंडी पर चढ़ने वाले जल रहस्य के बारे मे !! Ritika Dosi  |  September 7, 2020  |  अद्भुत मंदिर  |  No Comments डबरा से 27 तथा भितरवार से करीब 12 किलोमीटर दूर सिंध और पार्वती नदी के संगम स्थल पर बसे ऐतिहासिक ग्राम पंवाया में प्राचीन शिव मंदिर है जिसे लोग धूमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जानते है। इतिहासकारों के अनुसार सिंध नदी का पानी काफी ऊपर से झरने के रूप में नीचे गिरता है, वहीं पानी के नीचे गिरने से धुआं सा उठता है इसलिए इस मंदिर को धूमेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता है। मंदिर में महा शिवरात्रि पर्व के दौरान यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचते है। ऐसी मान्यता है कि महाशिवरात्रि पर्व पर भगवान शिव के दर्शन करने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। इतिहासकारों के मुताबिक मंदिर में स्थित भगवान शिव की पिंडी पर रोजाना ही प्रातः समय में जल चढ़ा मिलता है, जिसके बारे में अभी तक यह पता नहीं चल सका है कि आखिर पिंडी पर जल कौन चढ़ाता है। वहीं यह स्थान साहित्य के गौरव महाकवि भवभूति की कर्मस्थली रही है...

अद्भुत रहस्यमय हनुमान मंदिर

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अद्भुत रहस्यमय हनुमान मंदिर जहां से हनुमान जी गए थे पाताल लोक प्रभु राम और भ्राता लक्ष्मण को अहिरावण से छुड़ाने..!!! | babamahakaal जैसा की आप पढ़ ही रहें है यह रहस्यमय मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से 25 किलोमीटर दूर इंदौर रोड पर स्थित सांवेर नामक स्थान पर है उल्टे हनुमान मंदिर। इस मंदिर के बारे में जहाँ अनेक लोगों का मानना है उल्टे हनुमान मंदिर में स्थापित प्रतिमा हनुमान जी द्वारा उनके पाताल विजय की प्रतीक है। इसी प्रकार अनेक लोगों का यह भी मानना है कि सांवेर ही वह स्थान था, जहां से हनुमान जी पाताल लोक की और गए थे, वहीँ इस मंदिर के उलटे हनुमान की मूर्ति बारे में ये भी कहा जाता है में बजरंगबली की उल्टी प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा संभवतया हनुमान जी की विश्व में इकलौती उल्टी प्रतिमा है। हिन्दू धर्मग्रंथों में बल और बुद्धि के देवता माने जाने वाले हनुमान जी की खड़ी और बैठी हुई मूर्ति प्राय: सभी मंदिरों में मिलती है, लेकिन सिर के बल खड़े हनुमान जी प्रतिमा न केवल दुर्लभ बल्कि अप्राप्य ही है। रामायण के एक प्रसंग अनुसार, जब भगवान श्रीराम और रावण का युद्ध हो रहा था। तब रावण के मित्र पातालराज ...

2000 वर्ष पुराना माता का मंदिर जिनकी शक्ति को स्वयं महाकाल ने किया था प्रणाम….

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2000 वर्ष पुराना माता का मंदिर जिनकी शक्ति को स्वयं महाकाल ने किया था प्रणाम…. deepika gupta  |  March 8, 2018  |  अद्भुत मंदिर ,  उज्जैनी नगरी , हिंदू देवी देवता  |  2 Comments आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो जितना पुराना है उतना ही चमत्कारी भी है। जी हाँ देवी मां का यह मंदिर करीबन 2000 साल पुराना बताया जाता है। माँ बम्लेश्वरी देवी का मंदिर माँ बम्लेश्वरी देवी का मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 75 किलोमीटर दूर राजनांदगांव जिले में स्थित है। प्राकृतिक रूप से चारों ओर से पहाड़ों से घिरे डोंगरगढ़ की सबसे ऊंची पहाड़ी पर मां का मंदिर स्थापित है। वैसे इस पहाड़ी पर माँ बम्लेश्वरी देवी के दो मंदिर हैं। बड़ी माता बम्लेश्वरी मंदिर और छोटी माता बम्लेश्वरी मंदिर, एक मंदिर पहाड़ी के नीचे स्थित है और दूसरा पहाड़ी के ऊपर। मां के इस दरबार में आनेवाले भक्त मां से जो भी मन्नत मांगते हैं, मां उसे पूरा करती हैं। बड़ी माता बम्लेश्वरी मंदिर इस मंदिर के निर्माण को लेकर यहां कई किवदंतियां है। एक मान्यता के अनुसार राजा कामसेन और विक्रमादित्य के...

कई विशेषताएं लिए बाबा भोलेनाथ का मंदिर जो आज भी है अधूरा, जानिए क्यों है मंदिर इतना ख़ास…!!!

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कई विशेषताएं लिए बाबा भोलेनाथ का मंदिर जो आज भी है अधूरा, जानिए क्यों है मंदिर इतना ख़ास…!!! deepika gupta  |  February 13, 2018  |  अद्भुत मंदिर ,  बाबा महाकाल ,  हिंदू देवी देवता  |  3 Comments शिवरात्रि का पावन पर्व भगवान शिव और माँ पार्वती को अत्यंत प्रिय है। इस पर्व के दौरान  भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा की जाती है।वैसे तो दुनियाभर में शिव जी के कई भव्य और चमत्कारी मंदिर हैं,जिनकी अलग अलग कहानियां है और जिनसे शिव भक्तों की गहरी आस्था जुड़ी है, लेकिन आज शिवरात्रि के मौके पर हम आपको ऐसे एक शिव मंदिर भगवान शिव का भोजेश्वर मंदिर के बारे में बताने जा रहे ही जिसके बारे में पढ़कर आपको हैरानी तो होगी ही साथ ही महादेव की इस लीला पर अचम्भा भी होगा ।तो आइये जानते है इस अद्भुत मंदिर के बारे में जो कि एक शर्त के चलते आज तक अधूरा है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से लगभग 32 कि.मी. की दूरी पर भोजपुर है। वहीं पर स्थित है भगवान शिव का भोजेश्वर मंदिर। इस मंदिर की छत न बनी होने के कारण यह मंदिर अधूरा ही रह गया है इस मंदिर की विशेषता इसका अधूरा निर्माण हैं।...

आज जानिये इस मंदिर के खंभे झूलते हैं हवा में, रामायण काल से जुड़ा है इतिहास !!

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आज जानिये इस मंदिर के खंभे झूलते हैं हवा में, रामायण काल से जुड़ा है इतिहास !! भारत में ऐसे कोई मंदिर है जोकि अपने चमत्कार हो और कहानियों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में एक ऐसा ही मंदिर है जो की अपने ऐतिहासिक और चमत्कारी महत्व के लिए जाना जाता है।इस मंदिर की यह खासियत है कि इस मंदिर में स्तंभ बिना किसी सहारे के हवा में झूल रहे होते हैं इसके अलावा इस मंदिर का बहुत बड़ा संबंध रामायण काल से भी जुड़ा हुआ है। यह मंदिर बेंगलुरु से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर अनंतपुर जिले के लेपाक्षी गांव में है इस मंदिर के बिना किसी सहारे हवा में लटके हुए हैं। यहां के झूलते खंभों को लेकर यह मान्यता प्रचलित है कि इन कामों के नीचे से अपनी साड़ियां कपड़े निकालने पर मनुष्य मनोकामना पूरी हो जाती है। आज जानिये इस मंदिर के खंभे झूलते हैं हवा में, रामायण काल से जुड़ा है इतिहास !! लेपाक्षी गांव के साथ रामायण की कथा प्रचलित है कि सीता हरण के समय पक्षीराज जटायु ने रावण से युद्ध किया था और युद्ध में घायल होकर जटायु नहीं गिरे थे। जब भगवान राम ने जटायु को देखा तो कहा उठो पक्षी जिसे तेलुगु में...

Somnath

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Somnath Beach, Somnath Hub(s) :  Junagadh View Larger Map General In the Shivapurana and the Nandi Upapurana, Lord Shiva is quoted as saying, I am omnipresent, but I am especially in twelve forms and places. These places are known as jyotirlingas, and Somnath is the first to be found in the world. Around the linga the moon god Soma built a mythical temple of gold as an ode to Lord Shivas glory and compassion. Like the waxing and waning moon, and fittingly for a place associated with Lord Shivas cosmic dance of creative destruction, the Somnath temple has risen unfailingly from repeated acts of devastation. On Kartik Sud 14 in the Hindu calendar, the day of Shivas son Kartikeyas birth, a fair is held for four days at the shrine of Somnath. Millions of devotees converge here for these ebullient celebrations on the shores of the Arabian Sea. Background According to Puranic legend, Soma, the moon, married 27 sisters, but stubbornly favored one to the neglect of the others. Their father...