7 महीनों में कुतुब मीनार से भी ऊंचा 'महल' बन जाएगा, लोग दूर-दूर तक बुराई करेंगे

दिल्ली: 7 महीनों में कुतुब मीनार से भी ऊंचा 'महल' बन जाएगा, लोग दूर-दूर तक बुराई करेंगे

   
Ghazipur-Landfill

ख़बर है कि जिस रफ़्तार से गाजीपुर लैंडफिल की ऊंचाई बढ़ रही है, वैसे में अगले साल ये कुतुब मीनार और ताज महल से ऊंचा निकल जाएगा. इस ख़बर को कई विदेशी अखबारों और वेबसाइट्स ने भी उठाया है

दिल्ली में एक पहाड़ है. वो दिनोदिन और ऊंचा होता जा रहा है. लगातार और ऊपर उठता जा रहा है. पहाड़ अच्छे होते हैं. कुदरती होते हैं. मगर दिल्ली का ये पहाड़ इंसानों ने बनाया है. ये कोई उपलब्धि नहीं, शर्म की बात है.

ये ज़िक्र है पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में खड़े कूड़े वाले पहाड़ की. इसकी ऊंचाई बढ़ते-बढ़ते इतनी हो गई है कि अगले साल ये क़ुतुब मीनार से भी ऊंचा निकल जाएगा. क़ुतुब की ऊंचाई है 73 मीटर. फुट में नापें, तो लगभग 240 फुट. क़ुतुब ही क्यों, ये तो आगरा के ताज महल को भी पीछे छोड़ देगा. ताज महल से करीब आधा मीटर छोटा है कुतुब. ताज 73 मीटर ऊंचा है और कुतुब 72.5 मीटर. रिहायशी इमारतों में एक मंजिल की ऊंचाई करीब 3 मीटर होती है. इस हिसाब से अगले साल ये कूड़े का पहाड़ किसी 24 मंजिला इमारत के बराबर हो जाएगा.

दुनिया की सबसे प्रदूषित राजधानी है दिल्ली
अगर आप दिल्ली में रहते हैं और इस ओर कभी गए हैं, तो आपको पता होगा कि गाजीपुर के इस अति-विशाल लैंडफिल के कारण आस-पास का पर्यावरण कितना बर्बाद हो गया है. आसमान अतिरिक्त मटमैला दिखता है यहां. इसकी वजह से कई किलोमीटर के घेरे में लोगों का जीना मुहाल है. दूर से ही नथुनों में एक सड़ी बदबू घुस जाती है. आप यहां नहीं रहते, तो नाक पर हाथ रखे बिना गुज़र नहीं पाएंगे. यहां रहते हैं, तो दिन-रात ये बदबू झेलना आपकी मजबूरी है. इस लैंडफिल की वजह से आसपास की हवा, पानी और ज़हरीले हो गए हैं. हमारी इस धरती पर कुल 195 देश हैं. इन सारे देशों की राजधानियों में सबसे गंदी, सबसे प्रदूषित है हमारी दिल्ली. ये तमगा किसी और ने नहीं, UN ने दिया है हमको. इस तमगे की क्रेडिट लिस्ट में यकीनन इस कूड़े के पहाड़ का भी नाम है.

ख़बरों के मुताबिक, ये लैंडफिल हर साल तकरीबन 10 मीटर ऊंचा हो रहा है. फिलहाल ये 213 फुट से ज्यादा ऊंचा हो चुका है. जिस रफ़्तार से इसकी ऊंचाई बढ़ रही है, उस हिसाब से 2020 तक ये क़ुतुब मीनार और ताज महल को पीछे छोड़ देगा.

2017 में गाजीपुर लैंडफिल का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था. इसकी वजह से दो लोगों की जान चली गई (फोटो: रॉयटर्स)

क़ुतुब मीनार UNESCO की वर्ल्ड हैरिटेज साइट है
सल्तनत काल में क़ुतुब-उद-दीन ऐबक ने बनवाना शुरू किया था क़ुतुब मीनार. इतने सालों बाद भी इस मीनार का कितना नाम है. आज भी ईंट से बनी सबसे ऊंची मीनार है ये दुनिया की. यूनेस्को की वर्ल्ड हैरिटेज साइट भी है. सोचिए, इसी दिल्ली में हमने क़ुतुब मीनार के बराबर ऊंचा बनाया भी तो क्या? कूड़े का पहाड़!

2002 में ही बंद हो जाना चाहिए था ये लैंडफिल
Ghazipur Landfill को शुरू किया गया था 1984 में. इसकी अधिकतम सीमा 15 मीटर तय की गई थी. 2002 में इसकी अधिकतम क्षमता पूरी हो गई थी. उसके बाद से ही नगरपालिका किसी वैकल्पिक जगह की तलाश में थी, लेकिन हुआ कुछ नहीं. यहां कूड़ा ठिकाने लगाया जाता रहा. अनुमान है कि रोजाना यहां 600 से 650 ट्रक कूड़ा फेंका जाता है. गाजीपुर के अलावा दिल्ली में दो और लैंडफिल हैं- ओखला और भलस्वा. गाजीपुर पूर्वी दिल्ली नगरपालिका की जिम्मेदारी है. ओखला को संभालता है दक्षिणी दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन. और भलस्वा साइट उत्तरी नगरपालिका के जिम्मे हैं. सोचिए, कितना अथाह कूड़ा पैदा करते हैं हम. 2017 में गाजीपुर लैंडफिल का एक हिस्सा टूटकर नहर में गिर गया. दो लोगों की जान गई. कुछ दिन इसपर बातें हुईं. फिर मामला वही, ढाक के तीन पात. अब देखिए, ये और नाम (बदनाम) कमाने की तैयारी में है.

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